प्रदूषण के कारण स्कूल छुट्टी घोषित, अब ऑनलाइन चलेगी बच्चों की पढ़ाई School Holiday

By Meera Sharma

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School Holiday: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर खतरनाक स्तर पार कर लिया है। हवा की गुणवत्ता बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सुबह से शाम तक जहरीली धुंध का साया बना रहता है और सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद के स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया है। यह निर्णय बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है क्योंकि इस उम्र में प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा होता है।

ग्रैप चरण चार लागू हुआ

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने ग्रैप यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का चौथा और सबसे कड़ा चरण लागू कर दिया है। यह चरण तब लागू किया जाता है जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई चार सौ पचास से ऊपर पहुंच जाता है। इस चरण के तहत स्कूलों में फिजिकल क्लासेज पूरी तरह बंद कर दी जाती हैं। निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाती है और कुछ खास वाहनों को सड़कों पर चलने की मनाही होती है। यह सबसे सख्त प्रतिबंधात्मक कदम है जो केवल अत्यधिक गंभीर स्थिति में ही उठाया जाता है। प्रशासन का मानना है कि इन उपायों से प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी।

ऑनलाइन कक्षाओं का प्रबंध

स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए प्रशासन ने ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। शिक्षकों को कहा गया है कि वे नियमित समय पर डिजिटल माध्यम से पढ़ाई करवाएं। बच्चों को घर बैठे शिक्षा मिलती रहे इसके लिए विभिन्न ई प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं के छात्रों के लिए स्कूल पूरी तरह बंद रहेंगे। हालांकि दसवीं और बारहवीं के छात्र जो बोर्ड परीक्षा की तैयारी में हैं उनके लिए सरकार विशेष दिशा निर्देश जारी कर सकती है लेकिन फिलहाल उन्हें भी घर से पढ़ने की सलाह दी गई है।

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पूरे एनसीआर में लागू आदेश

यह निर्णय केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लागू किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा और गाजियाबाद में स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम और फरीदाबाद के स्थानीय अधिकारियों को यह अधिकार दिया है कि वे परिस्थिति के अनुसार स्कूल बंद करें या ऑनलाइन मोड में चलाएं। मुख्यमंत्री कार्यालय और शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि जब तक वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होता तब तक ये प्रतिबंध जारी रहेंगे। यह फैसला बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।

बच्चों की सेहत पर खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हवा में मौजूद पीएम दो दशमलव पांच और पीएम दस जैसे सूक्ष्म कण बच्चों के फेफड़ों और समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। इन कणों का आकार इतना छोटा होता है कि ये सांस के साथ शरीर में गहराई तक पहुंच जाते हैं। छोटे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उन पर प्रदूषण का असर जल्दी होता है। सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, गले में खराश और एलर्जी जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। इसलिए अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को सुबह और शाम के समय बाहर न भेजें और घरों में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।

जरूरी सावधानियां और सुझाव

मौजूदा हालात में अभिभावकों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए। घर की खिड़की दरवाजे बंद रखें लेकिन कमरों को अच्छी तरह हवादार भी बनाए रखें। बच्चे जब ऑनलाइन क्लास कर रहे हों तो उनकी आंखों को पर्याप्त आराम दें और स्क्रीन टाइम सीमित रखें। स्कूल या प्रशासन द्वारा जारी नोटिस पर लगातार नजर बनाए रखें। पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार एक्यूआई की निगरानी कर रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है तो प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। तब तक अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की पढ़ाई और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखें।

Meera Sharma

Meera Sharma is a talented writer and editor at a top news portal, shining with her concise takes on government schemes, news, tech, and automobiles. Her engaging style and sharp insights make her a beloved voice in journalism.

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